Thursday, October 17, 2019

हिन्दू धर्म को क्यों किया जा रहा हैं बदनाम?

एक बात मैं कई सालो से देखते हैं रहा हू मेरे दिल में बहुत चुभ रही थी क्या हिन्दू धर्म को छोड़ कर सभी धर्मो में अच्छाई के आलावाकोई  बुराई नही हैं  अगर गिनाने बेठु गिनती भूल जाओगे  फिर क्यों हिन्दुओ के ही त्यौहारो में बुराइया बताई जाती हैं और जो लोग अपमान करते हैं हिन्दू धर्म का क्या उन्हें इतिहास पता हैं अगर पता हैं तो मुझसे आकर सामने बात करे फिर मै उन्हें उनके धर्म के बारे बताता हू ।करवा चौथ को ही किस तरह से पेसे किया जाता हैं क्या पता हैं उनको  करवा चौथ के वारे में जिन्होंने आज status लगाये थे य वीडियो भेजे थे । मजाक़ बना के रखा हैं लोगो ने ।जो व्रत करती हैं उनमे कुछ तो तुम्हारी भी माता और बहने होंगी शर्म नही आती हैं लोगो को
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अध्याय 1 प्यार की पहली दस्तक "कुछ मुलाकातें इत्तफ़ाक नहीं होतीं, वे किस्मत की लिखी हुई पहली पंक्ति होती हैं।" ज़िंदगी अपनी रफ़्तार से चल रही थी। हर सुबह सूरज उगता, शाम ढलती और दिन बीतते जाते। सब कुछ सामान्य था, जब तक कि एक दिन किसी की मुस्कान ने समय को जैसे कुछ पल के लिए रोक नहीं दिया। पहली नज़र में जो एहसास हुआ, उसे शब्दों में बाँधना आसान नहीं था। वह केवल आकर्षण नहीं था, बल्कि एक अनजाना अपनापन था। ऐसा लगा मानो वर्षों से बिछड़ा कोई अपना अचानक सामने आ गया हो। धीरे-धीरे बातचीत शुरू हुई। छोटी-छोटी बातें लंबी चर्चाओं में बदलने लगीं। एक-दूसरे की पसंद, नापसंद, सपने, डर और उम्मीदें साझा होने लगीं। हर संदेश का इंतज़ार रहने लगा और हर मुलाकात दिन का सबसे खूबसूरत पल बन गई। यही वह समय था जब दिल ने दिमाग से आगे निकलना शुरू कर दिया। इंसान सामने वाले की कमियाँ नहीं, केवल उसकी अच्छाइयाँ देखने लगता है। शायद इसी वजह से लोग कहते हैं कि "प्यार अंधा होता है।" लेकिन क्या सचमुच प्यार अंधा होता है? शायद नहीं। प्यार अंधा नहीं होता, बल्कि वह भरोसे से भरा होता है। वह सामने वाले को उसकी कमियों सहित स्वीकार कर लेता है। यही उसकी सबसे बड़ी खूबसूरती भी है और सबसे बड़ी परीक्षा भी। समय बीतता गया। दोनों ने साथ जीने के सपने देखने शुरू किए। उन्हें लगा कि सच्चा प्यार हर मुश्किल पर जीत हासिल कर लेगा। लेकिन जीवन केवल भावनाओं से नहीं चलता। परिवार, समाज, जिम्मेदारियाँ, करियर और परिस्थितियाँ भी अपनी जगह रखती हैं। उसी समय एक सवाल जन्म लेता है— अगर प्यार इतना सच्चा था, तो आगे क्या हुआ? क्या सच्चा प्यार हमेशा अपनी मंज़िल तक पहुँचता है, या कुछ कहानियाँ अधूरी रहकर ही अमर बन जाती हैं? इस प्रश्न का उत्तर तुरंत नहीं मिलता। कुछ उत्तर समय के पास होते हैं, और समय उन्हें तभी देता है जब इंसान जीवन के कई मौसम देख चुका होता है। यहीं से इस कहानी की असली यात्रा शुरू होती है—एक ऐसे सफ़र की, जहाँ प्रेम है, विश्वास है, संघर्ष है, बिछड़ना है और अंततः स्वयं को पहचानने की कोशिश है। क्योंकि कुछ सवालों के जवाब सचमुच वक्त देता है…