Sunday, October 6, 2019

बंजारों का इतिहास

उत्तर प्रदेश में एक बंजारा जाति हैं जो अंग्रेजो के समय से  अपने सम्मान की लड़ाई लड़ लड़ती आ रही हैं ।अंग्रेजो ने उन्हें क्रीमिनल एक्ट में रखा था क्यूकि इन्होने अंग्रेजो की गुलामी को स्वीकार नही किया , ये लोग मुग़ल काल से ही व्यापारी रहे हैं और आज भी अपना व्यापार कर के गुजारा कर रहे है ।मुग़ल काल में इन्होने इस्लाम को नही अपनाया इसके लिए इन्हें बहुत यातनाये सहनी पड़ी परन्तु इस्लाम को स्वीकार नही किया। ये लोग मुख्ता नमक के व्यापारी थे मध्य एशिया से लेकर सम्पूर्ण भारत में भ्रमण करते थे। खुद का कुआ खोद कर पानी पीते थे। इनका कोई मुख्य निवास स्थान नही था ।अपने साथ में लाखो की मात्रा में बैल हाथी घोड़ा रखते थे जिससे माल को इधर से उधर ले जाते थे। ये लोग ज्यादा तर जंगलो में रहते थे इसी कारण इनका कोई निश्चित निवाश स्थान नही थे यही कारण रहा कि ये लोग आज बंजारा जाति के नाम से जाने जाने लगे। एक स्थाई निवास न होने के कारण इनकी शिक्षा हो नही पाई और आज भी इस वर्ग के लोगो में शिक्षा का आभाव भारी मात्रा में देखने को मिलती हैं इसी लिय जागरूकता का भी आभाव हैं ।मेरा सरकार से आग्रह हैं कि इन लोगी को अच्छी शिक्षा प्रदान कराई जाये ।बंजारा समाज के लोगो में दो महान व्यक्ति हुए हैं एक *बाबा लक्खी शाह बंजारा और दुसरे *संत सेवा लाल महाराज इनके नाम पर विश्व विद्यालय वनाये जाये और एक इस समाज को भी एक नई दिशा प्रदान की जाये।

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