Saturday, December 7, 2019

villagers voice tvऔरैया जनपद के विकास खण्ड के ऐरवा कटरा के ग्राम पंचायत उदईपुर के गाँव नगरिया राजाराम के लोगो को राशन डीलर फूलन देवी पति जय प्रकाश के द्वारा राशन नहीं दिया जा रहा है  इस गांव की आबादी लगभग 2000 के करीब हैं चूँकि नगरिया राजराम में एक बंजारा समुदाय के लोग रहते हैं उनके साथ कई वर्षों से भेदभाव किया जा रहा हैं इन लोगो को  राशन भी कम दिया जाता हैं व पैसे भी अधिक लिये जाते हैं व जाति सूचक शब्द बोल कर अपमानित किया जाता हैं व राशन डीलर के द्वारा माताओं और बहनों को गाली गलौज व अश्लील हरकतें तथा डीलर की बात न मानने पर राशन कार्ड काट दिया जाता हैं। करीब तीन महीने से राशन डीलर के द्वारा नगरिया राजराम के लोगो को राशन नही दिया जा रहा है जिससे गांव के लोग भुखमरी की कगार पर है बंजारा समाज के लोग अत्यंत गरीब हैं राशन डीलर व प्रधान  बादाम सिंह के द्वारा मानशिक व शारीरिक यातनाएँ दी जा रही हैं हम सभी नगरिया राजराम बंजारा समाज के मुख्य प्रतिनिधि राहुल सिंह बंजारा  सहित समस्त ग्राम वासियों की मांग हैं कि हमें न्याय दिलाने की कृपा करें अन्यथा हम बच्चे, बूढ़े और जवान सहित अनिश्चित कालीन भूख हड़ताल करने पर मजबूर हो जायेंगे। ये हमारी धमकी नहीं प्रार्थना है हम लोग बहुत ज्यादा पीड़ित हैं हमारी मदद करें।

अध्याय 1 प्यार की पहली दस्तक "कुछ मुलाकातें इत्तफ़ाक नहीं होतीं, वे किस्मत की लिखी हुई पहली पंक्ति होती हैं।" ज़िंदगी अपनी रफ़्तार से चल रही थी। हर सुबह सूरज उगता, शाम ढलती और दिन बीतते जाते। सब कुछ सामान्य था, जब तक कि एक दिन किसी की मुस्कान ने समय को जैसे कुछ पल के लिए रोक नहीं दिया। पहली नज़र में जो एहसास हुआ, उसे शब्दों में बाँधना आसान नहीं था। वह केवल आकर्षण नहीं था, बल्कि एक अनजाना अपनापन था। ऐसा लगा मानो वर्षों से बिछड़ा कोई अपना अचानक सामने आ गया हो। धीरे-धीरे बातचीत शुरू हुई। छोटी-छोटी बातें लंबी चर्चाओं में बदलने लगीं। एक-दूसरे की पसंद, नापसंद, सपने, डर और उम्मीदें साझा होने लगीं। हर संदेश का इंतज़ार रहने लगा और हर मुलाकात दिन का सबसे खूबसूरत पल बन गई। यही वह समय था जब दिल ने दिमाग से आगे निकलना शुरू कर दिया। इंसान सामने वाले की कमियाँ नहीं, केवल उसकी अच्छाइयाँ देखने लगता है। शायद इसी वजह से लोग कहते हैं कि "प्यार अंधा होता है।" लेकिन क्या सचमुच प्यार अंधा होता है? शायद नहीं। प्यार अंधा नहीं होता, बल्कि वह भरोसे से भरा होता है। वह सामने वाले को उसकी कमियों सहित स्वीकार कर लेता है। यही उसकी सबसे बड़ी खूबसूरती भी है और सबसे बड़ी परीक्षा भी। समय बीतता गया। दोनों ने साथ जीने के सपने देखने शुरू किए। उन्हें लगा कि सच्चा प्यार हर मुश्किल पर जीत हासिल कर लेगा। लेकिन जीवन केवल भावनाओं से नहीं चलता। परिवार, समाज, जिम्मेदारियाँ, करियर और परिस्थितियाँ भी अपनी जगह रखती हैं। उसी समय एक सवाल जन्म लेता है— अगर प्यार इतना सच्चा था, तो आगे क्या हुआ? क्या सच्चा प्यार हमेशा अपनी मंज़िल तक पहुँचता है, या कुछ कहानियाँ अधूरी रहकर ही अमर बन जाती हैं? इस प्रश्न का उत्तर तुरंत नहीं मिलता। कुछ उत्तर समय के पास होते हैं, और समय उन्हें तभी देता है जब इंसान जीवन के कई मौसम देख चुका होता है। यहीं से इस कहानी की असली यात्रा शुरू होती है—एक ऐसे सफ़र की, जहाँ प्रेम है, विश्वास है, संघर्ष है, बिछड़ना है और अंततः स्वयं को पहचानने की कोशिश है। क्योंकि कुछ सवालों के जवाब सचमुच वक्त देता है…